अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

मंगलवार को हिंदी भाषा के लोकप्रिय दैनिक अखबार "पत्रिका" के ब्लाग चंक स्तंभ मे "प्यारे चूहे साथियो ...जागो

" पोस्ट को स्थान मिला है.

जिसे आप नीचे पढ सकते हैं.gview

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बोदूराम ने नया चाइना मोबाइल लिया ...उसमे गाने तो डलवाया ही था लेकिन एक दिन मोबाइल पर प्रचार आया कि अब करिए अपने कालर्स को प्रभावित ...सुनाइये उनको गाने ..और बनाइये अपना ...
बोदूराम ने भी एक गाना चुना ......भीगे होठ तेरे ...प्यासा मन मेरा ...लगे तन मेरा ...
जो भी बोदूराम को फ़ोन करता ..यही गाना सुनाई देता ...एक दिन बोदूराम के पिताजी अपने हमउम्र दोस्तों के साथ बैठे थे ....अचानक उनको किसी काम की याद आयी और उन्होंने फ़ोन किया ....तो सामने से बोदूराम के मोबाइल पर गाना बजा ...भीगे होठ तेरे ..प्यासा मन मेरा .......

बोदूराम के पिताजी का उनके दोस्तों ने खूब मजाक उडाया ..बोले अरे वाह जनाब आपका बच्चा तो आपको अच्छा सन्देश सुनाया ..पर तुम्हारा होठ तो सुखा है भाई ...हा हा हा हा हा हा हा ,,,,,,

बोदूराम के पिताजी खून के घुट पीकर रह गए घर आये और आते ही बोदूराम को दो लट्ठ लगाकार स्वागत किया ...
बोदूराम ने कारण पूछा तो पिताजी बोले....मेरा होठ सुखा है और तुम मुझे भीगे होठ तेरे गाना सूना रहे हो .....बोदूराम को लट्ठ के साथ ही आत्म ज्ञान आ गया और तुंरत उसने अपना गाना बदल दिया और नया गाना लगा दिया ....ये तो सच है कि भगवान् है .......धरती पे रूप माँ बाप का ...ये बिधाता की पहचान है ....

अब बोदूराम के पिताजी बिना किसी वजह के ही अपने दोस्तों के सामने फ़ोन लगवाते और कहते ...सुन लो हमारा बेटा है .....बिलकुल श्रवन कुमार है .....

उधर बोदूराम की गर्लफ्रेंड भीगे होठ तेरे वाला गाना अपने सहेलियों को सुनाना चाहती थी और जैसे ही बोदूराम को फ़ोन लगाया ..यही गाना आया .....ये तो सच है कि भगवान् है .....धरती पे रूप माँ बाप का .......
बोदूराम की गर्लफ्रेंड नाराज हो गयी और बोदूराम को फ़ोन करके खूब जमकर महाभारत सूना दी ...

बोदूराम परेशान हो गया एक तरफ बाप से लट्ठ तो दूसरी तरफ गर्लफ्रेंड से गाली ....

बोदूराम को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था सामने से ट्रेन आ रही थी ......बोदूराम ने छलांग लगा दी और जाते जाते अपने मोबाईल में ये गाना लगवा गया ....जिंदा हु मै ...जिंदा हु मै ......

ब्लॉग एक ऐसा चौपाल हो गया है जहा पर हम अपनी सारी बातें एक दुसरे के बांट लेते है ...चाहे वह बाते सपने की हो या हकीकत की.

तीन दिन पहले ही चिट्ठा चर्चा मंच का टेम्पलेट बदला हुआ देखा ..टेम्पलेट की मौलिकता और सुंदरता को देखते हुए अपने इस ब्लॉग पर वही टेम्पलेट लगाने की सोची ...और रात को दो बजे तक जगाकर कोशीश की ...लेकिन मुझे ऐसा लगा कि डा.अमर कुमार जी ने सारा टेम्पलेट HTML जैसे खुद से डिजाइन कर रखे थे अतः मै हथियार डाल कर सो गया ..जबकि मुझे भी HTML का काफ़ी ज्ञान है.

सुबह फ़िर प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुआ क्युकी टेम्पलेट पूर्णतः एक खास तरीके से डिजाईन किया हुआ था....और
इस टेपलेट को किसी फ़्री डाऊनलोड साईट पर ढूंढ पाना मेरे लिये असंभव सिद्ध हुआ. थक हार कर यह प्रयत्न छोड दिया.
डा.अमर कुमार जी को शत शत बार प्रणाम उनके इस ज्ञान के लिए. बहुत जबरदस्त बुनावट की गई थी इसे तैयार करने में.

और मुझे लगा की अब टिप्पू चच्चा को भी हार माननी पडेगी. और सोचा कि चच्चा के इस टेंपलेट युद्ध का अब अंत होगया है.

फ़िर कल ही दोपहर में पता चला कि टिप्पू चच्चा के रोहित ने भी एकदम से वही टेम्पलेट लगा दिया ...चच्चा टिप्पू सिंह और रोहित बबूआ ने मिलकर टेम्पलेट बदल दिया तो मुझे डबल रोना आया अपने इस आधे अधूरे ज्ञान पर ....क्युकी मै तो एकदम से यह मान बैठा था कि यह टेम्पलेट इंटरनेट पर उपलब्ध हो ही नही सकता जबकि चच्चा ने तो डाऊनलोड लिंक ही थमा दिया पोस्ट में.

तो अब आपको भी प्रणाम चच्चा टिप्पू सिंह और आपके भतीजे रोहित को भी.

चच्चा टिप्पू सिंह जी आपसे एक अनुरोध है जब रोहित बबुआ इतना प्रखर बुद्धि का बालक है तो उसके ज्ञान की जानकारी हम कम जानकार लोगों को भी मिलनी चाहिये.तो क्यों ना एक टेक्नीकल ब्लॉग उसको खुलवा दे जिससे हम जैसे अल्प बुद्धी वाले लोग भी कुछ सीख सके.

आप मजे से टिप्पणी चर्चा करते रहे और रोहित बबूआ टेकनिकल चर्चा करते रहें.

हमारे ब्लाग गुरुदेव

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श्री गुरुवे नमः

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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