अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

समीर newनमस्कार , पंकज मिश्रा आपके साथ …कल अचानक तो नही मेरे नम्बर भेजने के बाद ब्लाग जगत के बादशाह ……आप तो समझ ही गये होगे कौन?

नही समझे अरे भईया बादशाह है ही कितने अपने समीर लाल “समीर” जी की बात कर रहा हु  …..ह तो अपने ब्लागजगत के बादशाह श्री मान समीर लाल जी का फ़ोन आया हमारे पास ….मै तो नम्बर देख कर ही समझ गया कि यह भारत मे तो कही से नही नम्बर है क्युकि यहा से लगभग सारे नम्बर का पहला दुसरा तो मालूम ही रहता है ..

खैर फ़ोन आया तो बात भी हुई ..दमन से घूमते-घूमते वापी ,वलसाड , नवसारी सुरत होते हुए हमारे जनपद जौनपुर तक बात आ गयी और हमारे जनपद मे समीर जी के रिस्तेदार रहते है जानकर खुशी हुई

अन्त मे समीर जी ने मुझसे कहा ..पन्कज और कुछ बताओ.

मेरे मुह से अचानक यही निकल गया जो कि सत्य है, मै बोला-

सर आप शरीर से जितने भारी लगते हो आपकी आवाज उतनी ही पतली है…और इसी बात के साथ प्रणाम के साथ हसते हुए मै और समीर जी ने फ़ोन बन्द किया ..

अब आप जितने लोगो ने आज तक समीर जी से बात किया है बताईये मै सही कहा कि नही ?

13 comments:

  1. Arvind Mishra on December 23, 2009 10:27 PM

    समीर जी न तो शरीर से भारी हैं और न पाँव से ..आपको जरूर गलतफहमी हुयी है पंकज !
    वे तो अखिलं मधुरं वाली शख्सियत के है भाई!

     
  2. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on December 23, 2009 11:17 PM

    पंकज जी!
    समीर लाल जी जितने अच्छे साहित्यकार हैं, उससे कहीं बढ़कर एक अच्छे इन्सान भी हैं।
    आप सचमुच भाग्यशाली हैं कि आपको ब्लॉगिंग के बादशाह का सानिध्य मिला!

     
  3. महफूज़ अली on December 23, 2009 11:25 PM

    मुझे ऐसा नहीं लगा था पर.... वे तो अखिलं मधुरं वाली शख्सियत के है भाई!

     
  4. राज भाटिय़ा on December 24, 2009 1:09 AM

    अरे समीर जी तो बिलकुल हल्के फ़ुलके है, लेकिन बाकी आप की बाते सही है,वेसे कभी कभी दिखते है फ़ुले फ़ुले

     
  5. Udan Tashtari on December 24, 2009 3:05 AM

    बहुत आनन्द आया उस दिन तुमसे बात करके!!

     
  6. M VERMA on December 24, 2009 6:24 AM

    समीर जी तो नाम से ही हल्के हैं.

     
  7. विनोद कुमार पांडेय on December 24, 2009 7:47 AM

    मैने तो अभी उनकी आवाज़ ही नही सुनी फिर और क्या कहूँ हाँ शरीर के बारे में तो मैं कुछ नही कह सकता पर ब्लॉग जगत में उनका ओहदा तो बहुत ही भारी है..

     
  8. खुशदीप सहगल on December 24, 2009 10:38 AM

    गुरुदेव समीर जी,

    कभी टीचर के सानिध्य में पंकज जी को आवाज़ सुनाइएगा...शायद राय बदल जाए....

    जय हिंद...

     
  9. निर्मला कपिला on December 24, 2009 11:02 AM

    धमने सुनी तो नहीं मगर आपने कहा है और उन्हों ने आपको मुस्कुरा कर जवाब दिया तो जरूर सही होगा। शुभकामनायें

     
  10. पं.डी.के.शर्मा"वत्स" on December 24, 2009 12:53 PM

    पंकज जी, ये बात तो आपने बिल्कुल सही कही......जब पहली बार उनसे बात हुई थी तो हमें भी यही लगा था ओर उनसे कहा भी था ।

     
  11. ताऊ रामपुरिया on December 24, 2009 2:52 PM

    व्यक्तित्व भारी है शरीर और आवाज नही .:) अभी मिल लेना मार्च महिना में.

    रामराम.

     
  12. dhiru singh {धीरू सिंह} on December 24, 2009 6:33 PM

    आवाज़ पतली नही मधुर है . वैसे अमिताभ बच्चन है तो पतले लेकिन अवाज़ भारी है .

     
  13. Murari Pareek on December 26, 2009 4:14 PM

    हा..हा.. पता नहीं मेरी कभी बात नहीं हुई!!!

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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