अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!!

एक चटका यहाँ भी

बोदूराम को शौक चढा शादी करने का , लेकिन समस्या यह है कि शादी करने के लिए कन्या कहा मिले ? एक तय भी किया था रामकटोरी के साथ तो बोदूराम अंगरेजी बोलने के चक्कर में गवां चुके है . अब आगे अपनी उम्र का लिहाज करते हुए फिर से शादी करने की तैयारी में है , पर समस्या यह है कि शादी करने के लिए लड़की कहा से खोजी जाय ..


बोदूराम के गाव में ही एक है पंडित जुगनू प्रसाद जो कि शादी विवाह कराने का पुण्य कम करते है , सुना  है बदले में १००० हजार नकद और शादी में पंडित वही रहेगे इसकी माग करते है .
बोदूराम भी सुबह ही तैयार होकर पहुच गया शादी के लिए पंडित जुगनू प्रसाद के पास.Drinker_3


पंडित जी स्नान करने जा रहे थे , एक जनेऊ कान पर चढा रखा था और गमछा कंधे पर लटक रहा था . बोदूराम प्रणाम करके बैठ गया .
पंडित जी स्नान करके ध्यान  भजन करके वापस आये और बोदूराम से आने का कारण पूछा ...
बोदूराम फफक कर रो पडा , पंडित जी समझ गए और बोले घबराओ मत मै अंधे लूले लंगडे सबका विवाह करवा दिया हु तू तो जवान ओ , रूपवान हो , तुम्हारे लिए तो एक मिनट में लड़की खोज दुगा ..... अच्छा ये बताओ - तुमको रेट पता है ना हमारा ?..
बोदूराम अचकचाया, पंडित जी ने दुबारा दुहराया , अरे भाई दाम शादी करवाने का ?


बोदूराम - हां पंडित जी पता है ना ! दाम घर से आ रहा था तो सरजू प्रसाद तेली ने बताय था .
पंडित जी खुश हुए और बोले -क्या बताया था सरजू प्रसाद ने ?
बोदूराम -मुझसे पूछा कहा जा रहे हो ? मै बताया कि आप के पास आ रहा हु तो कहने लगा चले जाओ है तो अच्छे पंडित यही दाम थोडा ज्यादा लेते है वैसे लड़की भी सुन्दर खोजते है ...
पंडित जी गुस्से में आकर बोले - ससुर सरजू प्रसाद  तो हमारे जैसन रहल की उनके जैसे बुडबक का शादी कराई देहली औ हमही के गरियावत बा ?


बोदूराम पंडित जी को शांत कराने की गरज से बोले - हां पंडित यही बात हम भी उससे बोले थे ..
पंडित जी बोदूराम से बोले - बोदूराम तुम मुझे नेक जान पड़ते हो इसीलिए तुम्हे एक मौका और देते है .. चलो बताओ पढी लिखी औरत चाहिए या गाव की अनपढ़ औरत ?
बोदूराम - पंडित जी पहले ये बता दीजिये दोनों में फर्क का है ?
पंडित जी- फर्क तो बहुत है लेकिन दो तीन बता रहा हु उसमे ही समझ जाओ ..सबसे पहले मान लो तुम अस्पताल में भरती हो और अगर पढी लिखी औरत जायेगी तो कैसे बात करेगी ?


पहले तो वो तुम्हारे लिए फल लेकर जायेगी और बोलेगी - घबराइये मत , डाक्टर से बात कर ली हु दो दिन में आराम आ जाएगा और तुम्हे छुट्टी मिल जायेगी ......ओ के .....
और अगर गाव की अनपढ़ औरत जायेगी तो -
जाते ही पहले तो अस्पताल तक पहुचने में हुई कठिनाई का विस्तार पूर्वक वर्णन करेगी फिर बोलेगी .....अरे बाप रे बाप इतना दुबले हो गए क्या सूरत बना राखी है ... कब तक ठीक होगा ये सब ......कुछ खाते पीते भी हो या नहीं ?............
मतलब की बीमारी को और बढा देगी ..


मरीज बोलेगा - घबराओ मत कल तक आराम आ जाएगा और दो तीन दिन के अन्दर छुट्टी मिल जायेगी
औरत - अरे ख़ाक छुट्टी मिल जायेगी यही रोग भूलन के लडके को हुआ था ऐसे ही डाक्टर टोल-मटोल कर रहे थे कल अचानक बाथरूम में घुसा निकला ही नहीं , उधर ही साफ़ .....
बोदूराम - पंडित जी ये तो बहुत सोच विचार करके फैसला करना होगा खैर दूसरा बताइये ..
शादी  के बाद मिया बीबी में झगडा होता है . अगर पढी लिखी बीबी रहेगी तो तुम्हे १० मिनट में झगडा करके फ्री कर देगी ऐसे ...
बोलेगी , देखो जी रोज रोज देरी से आते हो आपका आदत खराब हो  रही है , कल लगा की पी के आये हो , ये सब अच्छा नहीं है , आप मान जाओ नहीं तो मै पापा के घर चली जाउगी.......this is not fare ....
और अगर  गाव की अनपढ़ बीबी रहेगी तो ?


झगडा करने के आधे घंटे पहले से हीटर की तरह गरम रहेगी और देखते ही टूट पढेगी ..
आ गए अरे करम फूटी थी हमारी जो तुम जैसे के पाले पडी ,, हे भगवान् मैंने इससे शादी क्यों की ?
पति - अरे ये बात अब क्यों पूछती है ये तो शादी के पहले पूछना चाहिए था ना ?
पत्नी - अरे नासपीटे कहा मुह काला करके आया ? किसकी गोद में मेढक की तरह फुदक कर आया है ...
पति - मेरी माँ आधा घंटा लेट हु और आधे घंटे में ऐश नहीं करके आया हु ट्राफिक में फस गया था ..
पत्नी - हा हा बना लो बहाना जैसे कि मै जानती नहीं हु ये सब , जानते नहीं मै कौन हु ?
पति -   ना तो जानता हु और ना जानने की जरुरत हां इतना जरुर जानता हु न तो तू प्रधान मंत्री की बेटी है और ना ही मुख्यमंत्री की बहन --beer_drinker_animation


बोदूराम ने पंडित जी के पाँव छुए और १० रुपये भेट दिया और बोला पंडित जी आपने ऐसी बातें बतायी है कि मुझे पुनः सोचना पडेगा , मै आपसे दुबारा मिलाने आउगा ,
नोट - यह पोस्ट सिर्फ हँसी के लिए लिखा गया है इसे अन्यत्र ना ले !!

18 comments:

  1. हिमांशु । Himanshu on October 12, 2009 4:36 PM

    बोदूराम के चरित्र की सर्जना प्रसंशनीय है । मजेदार प्रविष्टियाँ आती हैं बोदूराम के बहाने । आभार ।

     
  2. चंदन कुमार झा on October 12, 2009 5:10 PM

    हा हा हा !!!! बोदूराम का यह किस्सा तो बहुत ही मजेदार रहा ।

     
  3. कापालिक on October 12, 2009 5:27 PM

    हमे तो आज मालूम पडा कि सर्वगुण संपन्न बोदूराम अभी तक "बोदूराम कुंवारे" का ही लेबल लगाये घूम रहे हैं? इत्ते बडे... और कंवारे? शर्म की बात है मिश्रा जी।

     
  4. योगेन्द्र मौदगिल on October 12, 2009 7:20 PM

    कम्प्यूटर पर भी वाचिक परम्परा खूब निभा रहे हो भाई.... साधुवाद...

     
  5. शरद कोकास on October 12, 2009 9:32 PM

    भई हम अन्यथा कतई न लेते अगर आप न लिखते तो ..अब मतलब तो साफ है .. हा हा ।

     
  6. विनोद कुमार पांडेय on October 12, 2009 11:07 PM

    मजेदार पंकज जी,मज़ा आ गया आपकी रचना पढ़ कर सबसे बड़ी बात पढ़ी लिखी और अनपढ़ पत्नी में अंतर भी समझ में आ गया..
    बहुत सुंदर...ढेर सारी बधाई

     
  7. Nirmla Kapila on October 13, 2009 10:22 AM

    sirf hansane ke liye? to lo jee ham hans pade aaj angerejee me hans rahe hain ha ha ha ha ha ha ha bodu ram ki jai

     
  8. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक on October 13, 2009 12:06 PM

    बोदूराम फफक कर रो पडा , पंडित जी समझ गए और बोले घबराओ मत मै अंधे लूले लंगडे सबका विवाह करवा दिया हु तू तो जवान ओ , रूपवान हो , तुम्हारे लिए तो एक मिनट में लड़की खोज दुगा ..... अच्छा ये बताओ - तुमको रेट पता है ना हमारा ?..
    बोदूराम अचकचाया, पंडित जी ने दुबारा दुहराया , अरे भाई दाम शादी करवाने का ?

    बहुत बढ़िया जी!
    इस पोस्ट में तो बोदूराम ने
    ताऊ को भी मात दे दी है।

     
  9. महफूज़ अली on October 13, 2009 12:27 PM

    hahahahahahaha ,............. bhai ............... Boduram ka bhi jawab nahin...........

     
  10. रश्मि प्रभा... on October 13, 2009 3:06 PM

    ji bhar ke hanse.....

     
  11. Murari Pareek on October 13, 2009 5:20 PM

    बोंदुरामजी लगता है अब न पढ़ी लिखी लायेंगे न अनपढ़ बिच की कोई कबाङेँगे!!

     
  12. Suman on October 13, 2009 9:43 PM

    nice

     
  13. tarav amit on October 13, 2009 10:22 PM

    मजेदार !!ठहाकेदार !!

     
  14. अर्शिया on October 15, 2009 1:09 PM

    वैसे असली मजा तो तब आता जब यह पता चलता कि यह बोदूराम है कौन?
    धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ----------
    डिस्कस लगाएं, सुरक्षित कमेंट पाएँ

     
  15. राज भाटिय़ा on October 15, 2009 3:38 PM

    मजे दार जी आप का बोदूराम, धन्यवाद

     
  16. Rakesh Singh - राकेश सिंह on October 16, 2009 2:49 AM

    हा... हा...

    पंकज भाई बोदुराम कहीं किसी की गोद में मेढक की तरह फुदकने तो नहीं चला गया ?

    मजेदार ... अगले कड़ी का इन्तजार रहेगा ...

     
  17. neelima sukhija arora on October 16, 2009 1:34 PM

    आपका बोदूराम तो मस्त है

     
  18. Prem Farrukhabadi on October 18, 2009 7:07 PM

    चरित्र की सर्जना प्रसंशनीय है .साधुवाद...

     

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साँस लेते हुए भी डरता हूँ! ये न समझें कि आह करता हूँ! बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हुबाब! मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ! इतनी आज़ादी भी ग़नीमत है! साँस लेता हूँ बात करता हूँ! शेख़ साहब खुदा से डरते हो! मैं तो अंग्रेज़ों ही से डरता हूँ! आप क्या पूछते हैं मेरा मिज़ाज! शुक्र अल्लाह का है मरता हूँ! ये बड़ा ऐब मुझ में है 'yaro'! दिल में जो आए कह गुज़रता हूँ!
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